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समकालीन रंगमंच व मैथिली में मीडिया की दशा और दिशा पर विचार विमर्श

R K S | 30-12-2018 22:38:24

समकालीन रंगमंच व मैथिली में मीडिया की दशा और दिशा पर विचार विमर्श Sonebhardaexpress.com | Bihar News | Nerth East News | West Bengal News | Sikkim News | Purnea News |

सहरसा:

- मैथिली कला साहित्य व फिल्म महोत्सव के तीसरे दिन हुआ विचार विमर्श सहरसा संवाददाता मिथिला कला साहित्य व फिल्म महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को रमेश झा महिला महाविद्यालय में समकालीन रंगमंच की स्थिति व मैथिली मीडिया की दशा और दिशा पर विचार विमर्श गोष्ठी आयोजित की गई। इस विचार गोष्ठी में नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार रमेश रंजन, प्रसिद्ध रंगकर्मी कुणाल, मैलोरंग के प्रकाश झा, विभूति झा, ऋ

षि वशिष्ठ व निर्देशक कुणाल ठाकुर शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि किसी संस्था के द्वारा नाटक मंचन मात्र करने से जन-जन मे जागृति नहीं आ सकती हैं इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति मे उत्सवधर्मिता को जीवित करना आवश्यक है। मिथिला मंे नारियों ने डोमकच, जट- जटिन, झिझिया व सामा चकेबा को उत्सव के रूप में सदियों से मना कर संस्कृति को सहेज कर रखी है। वर्तमान समय में गांव-गांव में रंगमंच की स्थिति को सहेज

े की जरुरत है। दूसरे सत्र में मैथिली मीडिया की दशा और दिशा पर विचार विमर्श गोष्ठी में प्रवीण नारायण चैधरी, कुमार आशीष, संजय कुमार, कन्हैया कुमार व संजीव नारायण सिन्हा ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि मैथिली पत्रकारिता का इतिहास 105 वर्ष का लंबा सफर है अभी तक तीन सौ से अधिक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हुआ है। वर्तमान में मिथिला दर्शन, मिथिला मोद, मैथिल हित साधन प्रकाशित हो रही हैं। वर्तमा

समय में सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक समाचार सम्प्रेषण व विचार विनिमय बढाने का भरपूर उपयोग किया जा रहा है जो मैथिली के लिए शुभ संकेत है। वहीं जानवी झा ने कहा कि मैथिली भाषा के संवर्धन व संरक्षण के लिए आधुनिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए निर्माण किया जाए।